The Jagran News: मंत्र जप से बदल सकती है भाग्य की रेखा, जानिए जप की संख्या और इसके चमत्कारिक लाभ
आशारामजी बापू के पुराने सत्संग एवं आश्रम के वरिष्ठ साधकों से हुए बातचीत पर आधारित..... यह बात सामने आई है कि आध्यात्मिकता के क्षेत्र में मंत्र जप एक अत्यंत प्रभावी और चमत्कारिक माध्यम है। निरंतर और पूरी श्रद्धा के साथ किया गया नाम-जप किसी भी व्यक्ति की जन्म कुंडली के दोषों को दूर करके उसके जीवन में बड़े और सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
सत्संग के अनुसार, जप की संख्या का सीधा कनेक्शन कुंडली के अलग-अलग भावों की शुद्धि से होता है। वरिष्ठ साधकों ने इसके लाभों का क्रमबद्ध विवरण कुछ इस तरह बताया है:
1 करोड़ जप: जन्म कुंडली का पहला केंद्र शुद्ध होता है, जिससे साधक को दैवीय स्वप्न आते हैं और गहरी शांति मिलती है।
2 करोड़ जप: धन स्थान की शुद्धि होती है, जिससे परिवार में सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि का रास्ता खुलता है।
3 करोड़ जप: सहज स्थान शुद्ध होता है, जिससे नामुमकिन और सबसे कठिन कार्य भी आसान हो जाते हैं।
4 करोड़ जप: सुख स्थान की शुद्धि होती है। इससे व्यक्ति मानसिक आघातों से सुरक्षित रहता है और उसका व्यक्तित्व बेहद प्रभावशाली बनता है।
5 करोड़ जप: पुत्र और विद्या स्थान शुद्ध होता है। इसके प्रभाव से निर्धन व्यक्ति भी दानवीर और कम पढ़ा-लिखा इंसान भी ज्ञान बांटने में सक्षम हो जाता है।
6 करोड़ जप: शत्रुओं का नाश होता है और कुदरत खुद व्यक्ति की रक्षा करने लगती है।
7-8 करोड़ जप: स्त्री/रिलेशनशिप स्थान शुद्ध होता है और अकाल मृत्यु जैसे भयंकर संकट टल जाते हैं।
9 करोड़ जप: इस स्तर पर पहुंचने के बाद साधक को अपने इष्ट देव का साक्षात्कार हो जाता है।
एकाग्रता और मौन से 100 गुना बढ़ता है प्रभाव
पुराने सत्संग के अनुभवों का हवाला देते हुए बताया गया है कि कैसे खतरनाक और विपरीत परिस्थितियों में भी सिर्फ नाम-जप के बल पर अहमदाबाद में 'मोक्ष कुटिया' जैसे आश्रम की स्थापना संभव हो पाई। साधकों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि जप महज कोई संख्या नहीं है; अगर इसे पूरी एकाग्रता, मौन और ब्रह्मचर्य के साथ किया जाए, तो इसका असर सौ गुना तक बढ़ जाता है।
अंत में यही निष्कर्ष निकलता है कि मंत्र जप की ताकत से न सिर्फ मानसिक क्लेश खत्म होते हैं, बल्कि इंसान जीवन के कठिन लक्ष्यों को हासिल कर आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।